ब्लीडिंग क्वींस – पलक कुंद्रा

हिंदी साहित्य करवट तो ले रही है और ये मानना होगा की एक होर सी साहित्यकारों के बिच मच चुकी है – हिंदी में ही क्यों न लिखूं? क्यों न ज्यादा से ज्यादा से पाठकों तक अपनी बात पहुँचाऊँ? और जब बात ज्यादा पाठकों तक अपनी लेखनी के माध्यम से पहुँचने की होती है तो बस हिंदी ही हमारे समक्ष एकमात्र विकल्प के रूप में प्रस्तुत होती है! और ऐसा ही कुछ अमृतसर की लेखिका पलक कुंद्रा जी का भी सोचना है – स्नातक तो वो अंग्रेजी साहित्य में हैं परन्तु जब पुस्तक लिखने की बात आयी तो उन्होंने हिंदी भाषा को ही चुना और अपनी प्रथम पुस्तक “ब्लीडिंग क्वीन” लिख डाली! और आज मैं इसी पुस्तक की समीक्षा करूँगा।

पलक कुंद्रा एक आशावादी या कह सकूँ तो एक क्रन्तिकारी लेखिका हैं जिन्होंने अपने लेखनी के माध्यम से ठहरे हुए पानी में मानो भंवर ला दिया हो और ये भंवर एक विकराल रूप लेकर मनो महिलाओं पे हो रहे हर अत्याचार और उनके खिलाफ हो रहे हर जुर्म को बस एक ही कौर में निगल जाना चाहता हो! जी हाँ, उनकी लेखनी में एक उन्माद है – और शायद बस उन्माद ही ज्यादा हो गया है! साहित्यिक परिकल्पना और साहित्य-संचालन शायद वक्त और अनुभव के साथ ही आती है और हम शायद अगली पुस्तक में पलक कुंद्रा जी से ज्यादा उम्मीद कर सकते हैं की वो अपनी उन्मादित विचारों के लिए एक पर्याप्त साहित्यिक ढांचा भी चुनेंगी! ब्लीडिंग क्वींस पुस्तक एक मध्यम लम्बाई का उपन्यास है जो जल्दी ही पढ़ी जा सकती है – ये मनोरंजक तो है ही साथ ही साथ बहुत गति के साथ आगे भी बढ़ती है! पर हाँ, पात्रों के दृष्टिकोण से देखें तो ये उपन्यास थोड़ी कमजोर मालूम पड़ती है।

मुख्य पात्र दिलजीत है जो एक साहसी एवं जोशीली लड़की है और चलचित्र की दुनिया में अपना नाम बनाना चाहती है। उसका परिवार भी उसके इस सपने को साकार करने में पूरा सहयोग करता है! हालाँकि वो अपने माता-पिता और भाई से साथ रहती तो दिल्ली में है किन्तु ये परिवार है मूलतः पंजाब से। शायद पलक भी अपनी प्रथम पुस्तक में अपना मूल नहीं भूलना चाहती थी और उसने कहानी को एक पंजाबी स्पर्श दे दिया!

कहानी शुरू एक हत्या के विवरण से होती है और हमें एक लड़की से परिचय करवाया जाता है जो अपनी अस्मिता को बचाने के लिए एक इंसान (या वहसी दरिंदा) से बचने की कोशिश कर रही है। पर जब चीजें हद से बाहर हो जाती हैं तो उसकी हत्या करके वो वहां से घायल अवस्था में ही भाग जाती है!

यही साहसी लड़की इस उपन्यास की मुख्य पात्र दिलजीत है – और वो सचमे एक नए आयाम और आधुनिक विचारों वाली लड़की है जिसको भविष्य में एक बहुत ही दर्दनाक घटना का सामना करना होता है। दिलजीत के साथ सामूहिक बलात्कार होता है और उसके पिता की हत्या भी कर दी जाती है और उसकी माँ घायल हो जाती है। इन सबमें लेखिका की एक बात सराहनीय है की पलक ने एक बहुत ही बड़ी बात को उठाया है – जब किसीके साथ कोई दर्दनाक घटना घटती है तो अगल-बगल से गुजरने वाले लोग भी या तो तमाशा देखते हैं या बस मजाक उड़ाते निकल जाते हैं – पर यहाँ तो हद हो गयी! एक “मर्द” जो की सामूहिक बलात्कार की घटना को देख रहा होता है खुद भी उस समूह में शामिल हो अपनी देह की भूख शांत कर लेता है – क्या है ये! काया क्या है हमारे समाज की अब? क्यों एक लेखिका के हाथों हम एक झन्नाटेदार तमाचा खाने को मजबूर गए?

आगे की कहानी बड़ी ही रोचक है और यही बताया गया है की कानून के हाथ जब बहुत ही छोटे मालूम होते हैं तो सामाजिक गुंडों द्वारा सतायी हुई दिलजीत खुद क्या करती है और पाठकों को उसके द्वारा उठाये गए कदम रोमांचित कर देंगे। महिला सशक्तिकरण के नाम पे हो रहे मजाक और वास्तविक सशक्तिकरण के बिच की खाई भी आपको बखूबी ही इस पुस्तक में दिख जायेंगे!

हाँ, पटकथा एवं विस्तार के मामले में यह उपन्यास कुछ और वृहत और बेहतर हो सकती थी पर क्यूंकि ये लेखिका की प्रथम पुस्तक है हम इस प्रयास से भी सहमत हो सकते हैं! आपको ये उपन्यास अवश्य ही पढ़नी चाहिए! आप ये किताब निचे दिए हुए लिंक से ले सकते हैं – अमेजॉन इंडिया से पुस्तक लेने के लिए निचे दिए हुए लिंक पे जाएँ।

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समीक्षा – प्रभास के द्वारा