#विचार

“अंकित सक्सेना को श्रद्धान्जली” लो एक और चढ़ा नफ़रत के परवान, ना वो हिन्दू था, ना था मुसलमान, एक बेटा था, एक प्रेमी था, जो मार दिया गया सरेआम, क्योंकि मर चुकी इंसानियत और मर चुका है इंसान! ना ही किसी ने आवाज़ उठायी, ना ही किसी ने गुहार लगाई, धर्म के नारों, बेकार की…

शायद ही कोई व्यक्ति होगा जिसने अपने जीवन काल में कोई भी कविता न पढ़ी हो। और युवाओं को तो इससे दूर रखना मानो असंभव प्रतीत हो, कोई दिली  तमन्ना हो या फिर अपने लेखनी से संसार को एक नया आयाम  देना हो दोनों ही जगह युवाओं की रूचि  इसमें बहुत ज्यादा होती है। अपने…

बुद्धिजीवी ये बड़े गर्व से कहते हैं की कलाकारों की गरिमा होनी चाहिए एवं कला को स्वतंत्रता मिलनी चाहिए – चाहे वो कुछ भी करें। हाल में ही म्यांमार के एक प्रान्त में हो रहे साहित्य सम्मलेन में ‘फ्री स्प्रीच’ और ‘ह्यूमन राइट्स’ की ‘चेम्पियन’ आंग सां सु की ने कहा की विचारों की स्वतंत्रता…

जब बात आधुनिक हिंदी साहित्य की होती है तो हमारा मन काफी भटकने सा लगता है। हिंदी साहित्य वाले कोने में भी हमें वही किताबें मिलेंगी जो अंग्रेजी लेखकों द्वारा लिखी गयीं हैं एवं हिंदी में अनुवादित करके बस ‘मेकओवर’ कर दिया गया है ताकि हिंदी पाठक भी लुभान्वित हो जाएँ क्यूंकि कहानियां तो सभी…

जब बारी हिंदी साहित्य की आती है तो ऑंखें दिखाना एक आम बात है और हम अक्सर ऐसा देखते भी हैं।  लिट्-फेस्टों में शायद किसी कोने में आपको दबी जुबान कुछ हिंदी के लेखक या कवि भी बात करते दिख जाएँ अनायास ही। वो भी असहज महसूस करते हैं अंग्रेजी साहित्यकारों की भीड़ में आने…