चुनी हुई कविताएँ – अटल जी

चुनी हुई कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी
कविता
प्रभात पेपरबैक्स
2015
पेपरबैक
123

एक ऐसी पुस्तक जो हर उस को पढ़नी चाहिए जिनकी कविताओं  रूचि है! अटल जी काव्य-संकलन एक नव-ऊर्जा का संचार करने वाली पुस्तक है जिसने हर पाठक एवं अनगिनत कवियों को प्रभावित किया है।

अटल बिहारी वाजपेयी जी की काव्य संकलन चुनी हुई कविताएँ एक प्रसिद्ध एवं बहुचर्चित पुस्तक है जो पाठकों और कविता-प्रेमियों के बिच बहुत लोकप्रिय हुई थी और अभी तक है। प्रभात पेपरबैक्स द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक अटल जी के 35 कविताओं का संकलन है और सारी कविताएँ एक से बढ़कर एक हैं! खास करके उनकी कविताएं कदम मिलाकर चलना होगा एवं अमर आग है आधुनिक कवियों के लिए एक उत्कृष्ट काव्य का उत्कृष्ट उदाहरण है। कविताओं के शुरू होने से पहले ही अटल जी द्वारा लिखे गए शब्द पाठकों को एक काव्य-ज्वर से प्रेरित कर जाते हैं! आइये, उनकी इस पुस्तक, चुनी हुई कविताएँ, का विश्लेषण एवं एक समीक्षा करते हैं।

“मेरे प्रभु!
मुझे इतनी ऊँचाई कभी मत देना
गैरों को गले न लगा सकूँ
इतनी रुखाई कभी मत देना।”

ये पंक्तियाँ बहुत बड़ी गहराई को बहुत कम शब्दों में कह जाती हैं। और कुछ ऐसी ही है अटल जी द्वारा रचित कविताएँ जो इस संग्रह में सम्मिलित हैं! उनकी वाकपटुता के कायल तो वो सब होंगे जिन्होंने उनकी भाषणों को सुना होगा, पर उनकी कविताएँ और भी मनोरम एवं लाजवाब होती हैं!

अटल जी जिंदगी को करीब से जानने वाले कवि हैं और उनकी कविताओं में सहसा ही उनकी वृहत सोच और समझ दिख जाती है। नए मील का पत्थर एक ऐसी ही कविता है जो हमें जीवन की उहापोह से अवगत करवाती है। इस कविता में कवि हमें जीवन की निरंतरता एवं मनुष्यों की दुर्बलता से परिचित करवाते हैं और अंततः यही सन्देश दे जाते हैं कि:

“सबकुछ दाँव लगाकर घाटे का व्यापार हुआ।
नए मील का पत्थर पार हुआ।”

हालाँकि कवि अटल जी अपने इस भाव के सामने उस पुरुषार्थ को ला खड़ा करते हैं जो मानव को इतना शक्तिशाली बना देता है की वो काल को भी चुनौती दे सके। अपनी लोकप्रिय कविता गीत नया गाता हूँ में वो लिखते हैं:

“हार नहीं मानूँगा,
रार नई ठानूँगा,
काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूँ।
गीत नया गाता हूँ
गीत नया गाता हूँ”

नव-पौरुष एवं परमार्थ से ओत-प्रोत अटल जी सबसे आकर्षक कविता जो मुझे इस पुस्तक में लगी वो निसंदेह ही “अमर राग है” थी। यह कविता मानो भारत-दर्शन को एक कविता में ही समेट देती है और क्यों नहीं – जब अटल बिहारी वाजपेयी जी जैसे ओजस्वी कवि चाहें तो असंभव शब्द शब्दकोष के स्वयं कहीं लुप्त हो जाता है!

अमर राग है सचमें एक अमर काव्य रचना है जो पाठकों को जीवंत कर देती है और उनमें एक चिर-ऊर्जा का संचार कर जाती है!

“वेद-वेद के मंत्र-मंत्र में
मंत्र-मंत्र की पंक्ति-पंक्ति में
पंक्ति-पंक्ति के शब्द-शब्द में,
शब्द-शब्द के अक्षर स्वर में,
दिव्य ज्ञान-आलोक प्रदीपित,
सत्यं शिवं सुंदरम शोभित, …

अपने इतिहास और अपने गौरवमयी कालखंडों का याद दिलाती यह कविता हमें यह एहसास दिलाती है की भारत समान कोई भी ऐसा देश न हुआ है कभी जिसे समस्त संसार ने अपना गुरु माना हो! यद्यपि, अटल जी हमें ये भी स्मरण करवाने में नहीं चूकते हैं की हमें अगर अपनी विश्व-गुरु गरिमा के साथ ही चलना है तो हम समस्त देशवासियों को “कदम मिलाकर चलना होगा”.

“कुश-काँटों से सज्जित जीवन,
प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
नीरवता से मुखरित मधुवन,
पर-हित अर्पित अपना तन-मन,
जीवन की शत – शत आहुति में,
जलना होगा, गलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा।”

अंततः, इतना ही कहूंगा की कोई भी पाठक जिनकी कविताओं में रूचि हो या कवि भी जो कविताओं को और करीब से जानना चाहते हों ये काव्य-संकलन अवश्य पढ़ना चाहिए! अटल बिहारी वाजपेयी जी की चुनी हुई कविताएँ एक सुधा-समान औषधि है जो मृत-मन में भी जीवन का संचार कर जाये! आप ये पुस्तक निचे दिए लिंक से खरीद सकते हैं:

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समीक्षा: अमित के द्वारा