उसके हिस्से का प्यार

उसके हिस्से का प्यार आशीष दलाल की प्रथम पुस्तक है। यह एक कहानी-संग्रह है जिसमे पाठकों को १७ कहानियां पढ़ने के लिए मिलेंगी। इस पुस्तक की प्रशंसा तमाम पुस्तक समीक्षकों ने तथा पाठकों ने भी खुले दिल से की है। आप पुस्तक के शुरू में ही उर्मि कृष्ण द्वारा की गयी समीक्षा पढ़ेंगे और वो वास्तविक में संतुलित और जायज भी है! आशीष दलाल जी ने जिस परिपक्वता का परिचय देते हुए ये किताब लिखी है वो वाकई में प्रंशसनीय है। हर कहानी मानो दिलों को छू जाती हो और जितने कम में उन्होंने अपनी बड़ी बड़ी भावनात्मक बातें कह दी हैं वो काबीले तारीफ ही है!

जहाँ तक उनके द्वारा रचित कहानियों की बात है तो आप स्पष्ट रूप से देखेंगे की हर कहानी कहानीकार के पहलुओं को बिलकुल संजीदा तरीके से पाठकों को परोसती है। शुरुआत ही एक बड़ी अच्छी रचना, एक रात की मुलाकात, से होती है। शालीन और रागिनी के दरमियान वो बीती हुई इक रात मानो हम में से कितनो को ही बीती हुई ज़िन्दगी में ढकेल देती है! और जिस बेहतर तरीके से प्रेम की एक अलग ही परिभाषा गढ़ने की कोशिश हुई है वो बस लाजबाब से काम कुछ भी नहीं है! आगे बढ़ते हुए आपको बहुत सी कहानियां मिलेंगी और हर कहानी एक से बढ़कर एक है।

मैं उसके हिस्से का प्यार कथा-संग्रह में कुछ और कहानियों का जिक्र जरूर करना चाहूंगा ताकि पाठकों को एक झलक तो मिल ही जाये की इतनी बेहतर ये रचना है! “उसके हिस्से का प्यार”, जी हाँ, इसी नाम की एक कहानी भी है, एक बहुत ही भावनात्मक एवं दिलों को अंदर तक झकझोर कर रख देने वाली कहानी है। एक बच्ची के दिल में उसके माँ के लिए जो प्यार होता है वो शायद मरणोपरांत भी नहीं खत्म हो सकता और यही बात उस कहानी में है। आशीष जी ने पलक और माधवी के माध्यम से कितनी ही माताओं को ये सन्देश दे दिया होगा… बच्चे बस प्यार के भूखे होते हैं जो उन्हें एक माँ ही दे सकती है और माधवी ये बात एक माँ से ही समझती है! “फैसला” भी एक मनोरम रचना है जो पाठकों को सोचने पे जरूर मजबूर करेगी। आखिर वारिश और कुलदीपक जैसी आकाँक्षाओं को कैसे सहती हैं माताएं और कैसे उम्मीद लगाए होते हैं पुरुष! बड़ी ही मार्मिक कहानी है ये और बड़ा ही सृजनात्मक अंत दिया है उसे आशीष दलाल जी ने! आपको पढ़के आनंद भी आएगा और ये संतुष्टि भी होगी की साहित्य में ‘बीकाऊ’ से हटके भी रचनाएँ हो रही हैं जो आशीष जी जैसे संजीदा लेखक कर रहे हैं!

ये रचनाएँ इतनी सरल भाषा में लिखी गयीं हैं की आप इस कथा-संग्रह को बस चंद घंटों में ही समाप्त कर लेंगे! कहानियां भी लघु कथाएं ही हैं जो की कम से कम में अपनी बातें कह जाती हैं! मैं पाठकों से यही आग्रह करूँगा की आप हिंदी साहित्य में किये गए इस महत्वपूर्ण एवं सार्थक योगदान को जरूर पढ़ें ताकि लेखक आशीष दलाल को ये स्फूर्ति मिले की वो अपने प्रयासों को ऐसे ही जारी रखें! आप इस कथा संग्रह उसके हिस्से का प्यार को निचे दिए गए अमेज़न लिंक से खरीद सकते हैं:

उसके हिस्से का प्यार – अमेजॉन इंडिया

समीक्षा अमित के द्वारा